जय-जय भारत माता - Poem

जय-जय भारत माता |
ऊँचा हिया हिमालय तेरा
उसमें कितना स्नेह भरा
दिल में अपने आग दबाकर
रखता हमको हरा-भरा,
सौ-सौ सोतों से बह-बहकर
है पानी फूटा आता,
जय-जय भारत माता |

कमल खिले तेरे पानी में
धरती पर है आम फले,
इस धानी आँचल में देखो
कितने सुंदर भाव पले,
भाई-भाई मिल रहें सदा ही
टूटे कभी न नाता,
जय-जय भारत माता |

तेरी लाल दिशा में ही माँ
चंद्र-सूर्य चिरकाल रहें
तेरे पावन आँगन में
अंधकार हटे और ज्ञान मिले,
मिलजुल कर ही हम सब गएँ
तेरे यश की गाथा,
जय-जय भारत माता |

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