रहीम के दोहे

रहीम के दोहे

तरुवर फल नहीं खात है, सरवर पियहि न पान |
कहि रहीम परकाजहित, संपत्ति संचाहि सुजान | |

जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करी सकत कुसंग |
चंदन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग | |

रहिमन देख बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि |
जहाँ काम आवै सुई, कहा करै तलवारि | |

बड़े बड़ाई न करै, बडाई न बोलै बोल |
रहिमन हीरा कब कहै, लाख टका मम मोल | |

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