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कविता (poem)
पड़ना है जी पड़ना है
पड़ना है जी पड़ना है
हमको ऊपर चढ़ना है |
थोड़े दिन की बात और है
जमकर खूब पड़ेंगे हम |
इम्तहान में ताल ठोंक कर
कुश्ती खूब लड़ेंगे हम |
पास इम्तहान करना है,
पड़ना है जी पड़ना है |
फिर गर्मी की छुट्टी होगी,
होंगे मौज - मज़े के दिन |
पिक्चर होगी, पिकनिक होगी
होंगे तब मस्ती के दिन |
मेहनत से क्या डरना है,
पड़ना है जी पड़ना है |
पापा-मम्मी से लेने हैं,
फिर तो हमको खूब इनाम |
मेहनत करने वालों की तो,
सदा मदद करते भगवान |
जीवन पथ पर पड़ना है,
पड़ना है जी पड़ना है |

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